जानिए कितना पुराना है भारतीय संगीत, जानकार होगा गर्व-केवल प्रामाणिक तथ्यों पर आधारित लेख

जानिए कितना पुराना है भारतीय संगीत, जानकार होगा गर्व -भारतीय संगीत का प्रामाणिक इतिहास

जानिए कितना पुराना है भारतीय संगीत, जानकार होगा गर्व-भारतीय संगीत के प्रामाणिक इतिहास का पूर्ण विवरण एवं विश्लेषण के लिए आगे पढ़िए। यूँ तो कहते है की संगीत का जन्म सृस्टि के प्रारम्भ में ही हुआ था। संगीत ब्रम्हांड के प्रारम्भ में ओंकार ध्वनि के साथ ही शुरू हुआ था। लेकिन प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर इसका वर्णन करना इसे जग प्रमाणित करने के उद्देश्य से अति आवश्यक हो जाता है।

भारत मे संगीत की उत्पत्ति, विकाष और प्रचार का इतिहास कुछ कम पुराना नहीं है।

जानिए आगे किस तरह जब पूरा विश्व पाषाण युग मे पत्थर तराश कर औजार बना रहा था। तब भारत मे संगीत, वादन एवं नृत्य कला ऋषि मुनियों द्वारा पूर्ण विकसित किया जा चुका था।

धार्मिक ग्रंथों एवं इतिहास में है वर्णित

महाभारत की कथा में हमने भगवान् श्री कृष्ण को बांसुरी बजाने वाले के रूप में जाना है। अर्थात महाभारत काल और उसके पूर्व समय में भी संगीत अपने प्रबल और विकसित रूप में मऊजूद था। उससे भी पूर्व रामायण काल, अर्थात त्रेता युग में भी संगीत के अस्तित्व में होने का प्रमाण हमे मिलता है। रामायण में महर्षि बाल्मीकि ने लव और कुश को गायन वादन में निपूर्ण बताया है और उनको संगीत में खुद प्रशिक्षण देने की बातो का उल्लेख किया है। रामायण में रावण को वीणा वादन में पारंगत बताया गया है जबकि रावण की पत्नी को नृत्य में निपूर्ण बताया गया है।

उससे भी पूर्व काल में वैदिक देवताओ जैसे ब्रम्हा, इंद्र, नारद, सरश्वती, रूद्र आदि को संगीत का ज्ञाता बताया गया है। ऋग्वेद के अंश सामवेद को संगीत का ज्ञान श्रोत माना जाता है। इस ग्रंथ में संगीत का विस्तारित वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों को 1500-1000 ई.पू के बीच के समय मे संकलित माना जाता है। अर्थात ये सभी रचनाये प्रामाणिक तौर पर 3000-4500 वर्ष पूर्व के है।

पुरातात्विक खोजो में भी मिले है प्रमाण

भारत के संगीत की अति प्राचीनता और अस्तित्व का प्रमाण मध्यप्रदेश के भीमबेटका रॉक शेल्टर जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, वहाँ गुफाओ में पूर्वपाषाण कालीन लगभग 30,000 साल पुरानी चित्र कलाकृतियाँ मौजूद है जिसमे नृत्य और बाध्य यंत्रो को दर्शाया गया है। यह अपने आप मे हमारे महान अतीत का जीता जागता प्रमाण है।
हज़ारो साल (4000-5000 साल) पुरानी सिंधु घाटी जैसे सभ्यताओं के दौरान भी नृत्य करती महिलाओं की मूर्तिया मिली है। नृत्य संगीत के बिना सम्भब तो नहीं है ये हम सब समझ सकते है।